अब झूठ बोलना बंद, डिटेक्टर की तरह ऐसे पकड़ लेगा स्मार्टफोन

मल्टीमीडिया डेस्क। कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के एक वैज्ञानिक ने शोध में खुलासा किया है कि फोन की मदद से यूजर पता कर सकेगा कि कोई व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। वैज्ञानिक ने एक मशीन लर्निंग एल्गोरिदम विकसित की है, जो यह पहचानने में मदद करती है कि कोई व्यक्ति झूठ बोल रहा है या नहीं।

इसके लिए स्मार्टफोन पर स्वाइप और टैप जेस्चर का अध्ययन करती है। शोध में कहा गया है कि ईमानदार लोगों की तुलना में झूठ बोलने वाले बात करने के दौरान अक्सर हाथों का अधिक इस्तेमाल करते हैं। इस विकसित एल्गोरिथ्म को वेरिटैप्स कहा जाता है।

जब बात सही होती है, तो इसमें हरे रंग की चिह्न दिखाई देता है। वहीं, जब बात झूठी होती है, तो लाल क्वेश्चन मार्क दिखाई देता है, जो यह बताता है कि दिया गया जवाब झूठा है। वर्तमान में ऐप प्रायोगिक चरण में है और केवल एंड्रॉइड स्मार्टफोन के लिए ही इसे डिजाइन किया गया है।

शोध के लेखकों में से एक अस्के मोटेलसन ने कहा कि झूठ का पता लगाने की एल्गोरिदम की क्षमता एक पॉलीग्राफ के बराबर है। हालांकि, इसकी सीमाएं हैं और इसे अदालतों या ऐसी किसी अन्य जगह इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए जहां बहुत कुछ दांव पर लगा हो।

अध्ययन में एक प्रतिभागियों को सच बोलने और झूठ बोलने के लिए कहा गया, ताकि फोन पर दिखने वाले रंग की जांच की जा सके। यह पाया गया कि झूठ बोलने वाले लोगों ने सच बोलने वाले लोगों की तुलना में औसत से अधिक समय लिया।

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