मध्यप्रदेश की राजनीति में वशंवाद की नई खैप तैयार

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में वशंवाद की नई खैप तैयार हो गई है. आगामी विधानसभा चुनाव में वंशवाद की ये राजनीति भी नजर आएगी. दस से ज्यादा नेता पुत्रों ने चुनावी में उतरने की तैयारी कर ली है. राजनीति में वंशवाद कोई नया नहीं है. वंशवाद का विरोध करने वाले नेताओं ने भी समय आने पर अपने पुत्रों या फिर परिजनों को राजनीति में स्थापित किया है. वैसा ही इस बार मध्यप्रदेश की राजनीति में होने वाला है.

2018 के आखिर में मध्यप्रदेश में विधानसभा के चुनाव होना हैं और 2019 के अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होना है. इन दोनों चुनावों में नेताओं और उनके पुत्रों की बड़ी संख्या राज्य की राजनीति में सक्रिय नजर आ रही है. अभी देखें तो स्वर्गीय अर्जुन सिंह के बेटे अजय सिंह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं. स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद हैं. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह विधायक हैं. स्वाभाविक है कि ये नेता तो इन चुनावों में रहेंगे ही क्योंकि सभी ठीक से स्थापित हो चुके हैं लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव में वंशवाद की नई खैप तैयार हो गई हैअब जो नए चेहरे आने वाली है, उनमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान का नाम सबसे आगे है. माना जा रहा है कि विधानसभा का चुनाव कार्तिकेय लड़ने की लिए पूरी तरह तैयार है. पिछली बार शिवराज ने दो सीटों से चुनाव लड़ा था और माना जा रहा है कि उन्हीं में से एक सीट पर कार्तिकेय को मौका मिलेगा.

बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय संगठन में आने के बाद प्रदेश सरकार के मंत्री का पद छोड़ चुके हैं. हालांकि, कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं. विजयवर्गीय अपने बेटे को राजनीति में स्थापित करना चाहते हैं.

 
सागर जिले के विधायक और कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव 2014 में ही सागर से अपने बेटे अभिषेक भार्गव को चुनाव लड़ाना चाहते थे, लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिल पाया था. इस बार गोपाल भार्गव भी चाहते हैं कि उनका बेटा विधानसभा का चुनाव लड़े

बीजेपी हो या फिर कांग्रेस. दोनों ही पार्टी में वंशवाद की परंपरा रही है. भले ही वंशवाद को लेकर नेता कितना भी मना करें, लेकिन सत्ता का लालच के आगे सभी का इमान डिग-डिगाने लगता है. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर भी अपने बेटे को चुनावी मैदान में देखना चाहते हैं. उनके बेटे देवेंद्र प्रताप सिंह चुनाव के लिए तैयार हैं.

चुनावी रेस में सीएम से लेकर मंत्री, सांसद के बेटे सबसे आगे
जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बेटा सुकर्ण मिश्रा
वन मंत्री गौरीशंकर शेजवार का बेटा मुदित शेजवार
वित्तमंत्री जयंत मलैया का बेटा सिद्धार्थ मलैया
कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन की बेटी मौसम बिसेन
पूर्व मुख्यमंत्री और गोविंदपुरा से विधायक बाबूलाल गौर की बहू कृष्णा गौर
छिंदवाड़ा सांसद कमलनाथ का बेटा नकुल नाथ
सागर से सांसद लक्ष्मी नारायण यादव का बेटा सुधीर यादव
सांसद नंदकुमार सिंह चौहान का बेटा हर्ष सिंह चौहान

हमेशा से वंशवाद का हर एक पार्टी में विरोध होता आ रहा है. बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टी योग्यता का हवाला देकर वंशवाद की इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति में कई नेता पुत्रों को जगह भी दी है. इनमें तोमर, प्रभात झा, नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव और विजयवर्गीय के बेटे शामिल हैं.

मध्यप्रदेश की राजनीति में बड़ी संख्या में नेताओं के बेटे सक्रिय हैं. ऐसे में उन सभी युवा नेताओं का पत्ता कट सकता है, जिनके ऊपर उनके राजनेता पिताओं का साया नहीं है. राजनीतिक पार्टियों में वंशवाद कूट-कूटकर भरा है. नेता कितना भी मना करें, लेकिन इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ उन्हीं का होता है.

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