सरकार संगठन से ऊपर नहीं, टिकटों के बंटवारे में संगठन होगा भारी.!

भोपाल। कांग्रेस और बीजेपी में यहीं फर्क है. यहां व्यक्ति की नहीं संगठन की चलती है. और सरकार संगठन से ऊपर नहीं है. बुधवार को मध्यप्रदेश की राजनीति में हुआ बदलाव बता रहा है कि चुनाव 2018 के लिए संघ और भाजपा ने अपनी मजबूत टीम मैदान में उतार दी है. निसंदेह यह साफ संकेत मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के लिए भी है. अब टिकटों का बंटवारे में सरकार नहीं संगठन भारी होगा.

क्षेत्रीय संतुलन खास
इसे भाजपा-संघ का रणनीतिक कौशल ही कहा जाना चाहिए कि कांग्रेस के कद्दावर नेताओं के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए भी महाकौशल विंध्य, ग्वालियर-चंबल, भोपाल, विदिशा, इंदौर मध्यक्षेत्र और वर्गीय संतुलन को साधते हुए एक दर्जन से ज्यादा नेताओं से लैस चुनाव प्रबंध समिति खड़ी कर दी है.

कई बार सक्रिप्ट बदली


सूत्रों के अनुसार पिछले डेढ़ महीने से लिखी जा रही इस सक्रिप्ट में कई बार कथानक बदले और किरदार भी बदले. लेकिन संघ मुख्यालय नागपुर में मुख्यमंत्री की पेशी के बाद साफ हो गया कि अब शिवराज और नंदकुमार की जोड़ी का अलग होना तय है.

कमलनाथ को बैलेंस करने के लिए
अब सवाल यह है कि जबलपुर के तीन बार के सांसद राकेश सिंह क्यों? बात एकदम साफ है कांग्रेस से महाकौशल के नेता कमलनाथ का मैदान में उतरना तय है. यहां की 38 में से 24 विधानसभा सीट पर भाजपा का कब्जा है. कमलनाथ की क्षमता पूरे महाकौशल और विंध्य को प्रभावित करने की है. इसीलिए एक अन्य फायर बांड नेता प्रहलाद पटेल को भी चुनावी टीम में जोड़ा है.

लो प्रोफाइल नेता
खास बात यह भी है कि राकेशसिंह संघ और संगठन की लाइन को फॉलो करने वाले लो प्रोफाइल नेता हैं. जिसकी सख्त जरूरत चुनावी प्रबंध समिति के संयोजक नरेंद्र सिंह तोमर को है. तोमर की सीनियरिटी अब प्रदेश के हर जिले में दौरे कर ग्राउंड वर्क करने वाले नेता की नहीं है. वे अब एक समानांतर ताकत के साथ प्रदेश में अपनी एंट्री ले चुके हैं.

जैन को प्रदेश में रहने के आदेश
भाजपा के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि शिवराज सरकार के खिलाफ लगातार मिल रहे जमीनी फीडबैक के बाद कुछ अंदरूनी खास बदलाव और भी किए गए हैं. प्रदेश के कद्दावर संघ के नेता अरूण जैन जो कि संघ की केंद्रीय टीम में शामिल हो गए हैं. उन्हें चुनाव तक प्रदेश में ही रहने के संकेत दिए गए हैं. राकेश सिंह जैन के नजदीकी हैं. जब जैन संघ के सहक्षेत्र प्रचारक थे तब उनका कार्यक्षेत्र जबलपुर था और उन्होंने ही राकेश सिंह की क्षमताओं का आकलन कर उन्हें पहली बार जबलपुर से टिकट दिया था.

मेनन की भूमिका
इसी तरह संघ के अन्य कद्दावर नेता अरविंद मेनन जो इन दिनों अमित शाह की टीम में दिल्ली में हैं. उनकी पसंद भी राकेश सिंह रहे. मेनन जब महाकौशल का प्रभार देख रहे थे तब उन्होंने राकेश सिंह के काम को नजदीक से देखा है. इसी का नतीजा है कि राकेश सिंह की नजदीकियां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बनीं और वे महाराष्ट्र के सह प्रभारी होते हुए लोकसभा में सचेतक भी बनें.

तोमर अगले सीएम?
सूत्र बताते हैं कि तोमर चुनाव में वापसी करेंगे, यह पूरी तरह से तय था. क्योंकि मध्यप्रदेश भाजपा में शिवराज के बाद उनकी बराबरी का कोई नेता नहीं है. वे भी इस बात को समझ रहे थे. लेकिन वे इस बार चुनाव करवाने के साथ-साथ वजनदार भूमिका भी चाहते थे. जिसका पूरी तरह से सम्मान करते हुए उन्हें प्रबंध समिति का संयोजक बना दिया है. हालांकि उनके समर्थन में सोशल मीडिया में मैसेज चलने लगे हैं कि भाजपा में जो भी संयोजक बनता है वह अगला मुख्यमंत्री भी बनता है.

सिंधिया, दलित हिंसा से मुश्किल
एक वरिष्ठ भाजपा नेता का कहना है कि भिंड –मुरैना में हाल ही में हुई दलित हिंसा को लेकर पार्टी हाइकमान चिंतित है. यहां पर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के बढ़ते प्रभाव ने भी हालात मुश्किल किए हैं. इसलिए नरोत्तम मिश्रा, स्वयं तोमर एवं मायासिंह जैसे तीन नेता इस क्षेत्र के चुनावी टीम में हैं

पूर्व नेता भी संभालेंगे मैदान
भोपाल विदिशा का इलाका मुख्यमंत्री के प्रभाव क्षेत्र का है. इसी तरह पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इंदौर मालवा में अपनी पकड़ रखते हैं. फग्गनसिंह कुलस्ते, भूपेंद्रसिंह आर्य को आदिवासी दलित वर्ग को ध्यान में रखते हुए टीम में रखा गया है. चर्चा है कि चुनाव प्रबंध समिति के अलावा भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री माखनसिंह, कृष्णमुरारी मोघे, अरविंद मेनन को भी जिम्मेदारी देकर मैदान में उतारा जा रहा है.

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