नूरपुर हादसे से सबक लेते हुए सरकार ने स्कूली वाहनों को लेकर बनाया ड्राफ्ट

शिमला: नूरपुर सड़क हादसे से सबक लेते हुए सरकार ने स्कूली वाहनों को लेकर ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। इस ड्राफ्ट को मंत्रिमंडल की सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद अब लोगों से भी इस संबंध में सुझाव मांगे गए हैं। 15 दिन के भीतर लोगों को अब इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव भेजने होंगे। इसके बाद सरकार इसकी अधिसूचना जारी करेगी। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को देखते हुए यह ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके अनुसार अब प्रदेश के प्रत्येक जिला में सड़क सुरक्षा को लेकर कमेटी बनाई जाएगी। इस कमेटी में सभी जिला के जिलाधीशों को कमेटी का चेयरमैन बनाया जाएगा।

इसके साथ ही पुलिस उपायुक्त सहित उपनिदेशक (उच्च शिक्षा विभाग, प्रारंभिक शिक्षा विभाग) तथा मंडलीय व क्षेत्रीय प्रबंधक एच.आर.टी.सी. इस कमेटी के सदस्य होंगे। इसके साथ ही सचिव परिवहन विभाग कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। इसके साथ ही उपमंडलीय स्तर पर भी एक कमेटी बनाई जाएगी। एस.डी.एम. इस कमेटी के चेयरमैन होंगे। इसके अतिरिक्त पुलिस, एजुकेशन व परिवहन निगम के अधिकारी इसके सदस्य होंगे और ए.आर.टी.ओ. परिवहन विभाग इसके सदस्य सचिव होंगे। यह कमेटी हर 3 माह के बाद सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों की पालना संबंधित कार्यों की रिपोर्ट सरकार को देगी।

जी.पी.एस. से लैस होनी चाहिए स्कूल बसें
सभी स्कूल बसों में जी.पी.एस. की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इसके साथ ही वैध लाइसैंस के साथ ही चालक की उम्र भी 60 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश
स्कूल के बच्चों को ले जाने वाली बस या अन्य वाहन के पीछे व सामने 400-400 एम.एम. आकार में स्कूल बस लिखा जाना चाहिए। किराए के वाहन या बस पर स्पष्ट रूप से स्कूल ड्यूटी पर लिखा जाना चाहिए। चालक के नाम व लाइसैंस संख्या सहित उसका नम्बर बस के भीतर, विद्यालय और बस मालिक का नाम, चाइल्ड हैल्पलाइन नम्बर 1098 और वाहन पंजीकरण संख्या को चमकीले रंग से बस के प्रमुख स्थानों पर लिखना होगा ताकि अभिभावक आवश्यकता पड़ने पर स्कूल प्रबंधन, पुलिस व अन्य अधिकारियों को सूचित कर सकें। स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों की उम्र 12 वर्ष से अधिक हो तो बस या फिर वाहन में बिठाए गए विद्यार्थियों की संख्या निर्धारित क्षमता से डेढ़ गुना से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक उम्र के विद्यार्थियों को एक व्यक्ति माना जाएगा। स्कूल बस की सीटें अज्वलनशील सामग्री से बनी होनी चाहिए। इसके साथ ही बस में प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स के साथ ही पीने के लिए पानी भी होना चाहिए। बस के पर्दे तथा शीशे पर पेंटिंग नहीं होनी चाहिए।

स्कूलों द्वारा संचालित बसों के लिए निर्देश
स्कूली बसों का रंग पीला होना चाहिए। इसके साथ ही बसों में स्कूल का नाम भी स्पष्ट तौर पर लिखा जाना चाहिए। इसके साथ ही बसों में स्पीड गवर्नर सहित सी.सी.टी.वी. कैमरे की व्यवस्था भी अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। इसका रिकार्ड भी नियमित रूप से स्कूल प्रबंधन के पास होना चाहिए। इसके साथ ही बसों में 5 किलोग्राम क्षमता वाले आई.एस.आई. चिन्ह वाले 2 अग्निशमन यंत्र होने चाहिए। बस चालक के पास भारी वाहन चलाने का 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। इसके साथ ही बस चालक को ग्रे कलर की वर्दी, काले रंग के जूते व उसकी नेम प्लेट कमीज पर लगानी होगी। बस परिचालक के पास स्कूली बच्चों की कक्षा व आवासीय पता सहित संपर्क नम्बर व ब्लड गु्रप आवश्यक होना चाहिए।

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