अपने ही सामने वर्षों से जमे अतिक्रमण नहीं हटा पा रहा नगर निगम

जबलपुर। अतिक्रमण शहर के लिए नासूर बन चुका है। ऐसा नहीं कि नगरीय प्रशासन इसे हटाने के लिए कोशिशें नहीं कर रहा। परन्तु नगर निगम की लाचारी तब सामने आई जब उसके ही सामने वर्षों से जमे अतिक्रमण आज भी जस के तस बने हुए है।

सवाल ये उठता है कि क्या यहां नगर निगम का जोर नहीं चल रहा। सडक़ और फुटपाथ आम लोगों के निकलने के लिये और आवागमन के लिये होता है लेकिन जब नगर निगम की आंख के सामने ही बेखौफ कब्जाधारी दुकान सजा लें और चोरी व सीनाजोरी करें तो बाकी शहर का हाल क्या होगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। तीन पत्ती चौराहे पर मानस भवन से आनंद भंडार की ओर जाने वाले लेफ्ट टर्न पर बैग और जूते, चप्पलों की दुकान बिलकुल सडक़ पर सजी है,।

यहीं पर एक रेस्टोरेंट के वाहन सडक़ पर पार्प होते हैं। जूत, चप्पल, बैग वाले आधी सडक़ तक बांस, बल्ली व तिरपाल लगायें हैं और बीच सडक़ पर एक पत्थर रखकर उस पर रस्सी बांधे हैं। लेफ्ट टर्न से मुड़ने वाले वाहनों के लिये ये दुर्घटना का बड़ा कारण बन सकते हैं इतना ही नहीं दुकानदार अतिक्रमण किये हैं और वाहन चालकों को यातायात का नियम बताते हैं।

क्षेत्रीय व्यापारियों का कहना है कि आये दिन यहां विवाद होते हैं किसी दिन बड़ा बवाल मच सकता है। कारण यह है कि यहां अतिक्रमण करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के हैं और किसी दिन हिन्दुवादी संगठन के नेताओं से उलझ गये तो मामला सप्रदायिक रंग ले सकता है। आश्चर्य की बात यह है कि नगर निगम के अधिकारी खुद यहां से दर्जनों बार निकलते हैं और यातायात विभाग के रंगदार डीएसपी भी यहां से माईक पर अलाउंसमेंट करते निकलते हैं अतिक्रमणकारियों पर उनकी रंगदारी नहीं चलती। न केवल लेफ्ट टर्न बल्कि तीन पत्ती चौराहे से जाहंगीराबाद तक कमोवेश इसी तरह की दुकानें और लस्सी के ठीहे लगे हैं, यहां आने वाले ग्राहकों के वाहन सडक़ पर खड़े रहते हैं जिससे यातायात प्रभावित होता है लेकिन फिर भी कार्यवाही करने से निगम का अमला क्यों कतराता है..? यह समझ से परे है।

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