इस मुद्दे पर सरकार की तरफ से जब भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने पक्ष रखा तो उनके बयान पर राज्यसभा में हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए स्पीकर के करीब आ गए जिसके बाद सदन की कार्यवाही कल 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

इससे पहले सदन में सरकार का पक्ष रखते हुए शाह ने कहा कि असम में एनआरसी असम समझौते का परिणाम है जो 1985 में पूर्व पीएम राजीव गांधी ने किया था। उनका इतना साहस नहीं था कि इसे लागू कर पाते और महने कर दिया। इसका विरोध करने वाले किसे बचाना चाहता है।

वहीं इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नागरिकता साबित करने के लिए एक व्यक्ति के साथ सरकार भी सामने आए। नागरिकता साबित करने के लिए उन्हें कई सबूत देने हैं, सरकार लोगों को कानून मदद दे। अगर व्यक्ति 16 में से एक भी सबूत देता है तो उसे नागरिक माना जाना चाहिए। इसे वोट की राजनीति का विषय ना बनाते हुए राज्य और केंद्र सरकार मानवाधिकार का विषय मानें।

वहीं सपा सांसद रामगोपाल यादव ने कहा कि अगर देश के नागरिक का नाम ही लिस्ट में नहीं होगा तो वो कहां जाएगा। हमारा संविधान देश के लोगों को कहीं भी जाने, रहने और व्यवसाय की इजाजत देता है। अगर लोगों के पास वैध दस्तावेज हैं तो उनका नाम लिस्ट में शामिल किया जाए।

वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने केंद्र सराकर पर हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां विभाजनकारी हैं। भाजपा दलितों और अल्पसंख्यकों को परेशान कर रही है। अगर किसी के पास एक भी सबूत नही है नागरिकता का तो क्या वो भारत का नागरिक नहीं है। सरकार सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है।