गुजरात से जुड़े हैं कछुएं-कोरल की तस्करी के तार

इंदौर। फेसबुक और वाट्सएप पर कछुएं-कोरल की तस्करी करने का दो महीने पहले मामला सामने आया था, जिसमें आरोपित से पता चला है कि जीवों के अवैध व्यापार के तार गुजरात के जूनागढ़ में एक तस्कर से जुड़े हैं। तस्कर को टाइगर स्ट्राइक फोर्स की (इंदौर-भोपाल) टीम ने गिरफ्तार कर रविवार को कोर्ट में पेश किया। यहां से उसे रिमांड पर भेज दिया।

8 मार्च को मुखबिर की सूचना पर फोर्स शिवाजी मार्केट स्थित प्रेम एक्वेरियम पर छापा मारा गया था। टीम के सदस्यों को वहां से दुर्लभ प्रजाति के कुछ कछुएं (2) और कोरल (8) मिले थे, जिनका अवैध रूप से व्यापार करना सामने आया था। टीम ने दीपक पिता महादेव सुरवाडे को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने चेन्नाई और कोलकाता से खरीदकर लाना बताया। आरोपी दीपक ने बताया कि वाट्सअप के जरिए कुछ ग्राहक उसे जुड़े हैं, जिन्हें कछुएं और कोरल का फोटो भेजता है।

उसके बाद वे ऑर्डर देते हैं, जिनका सौदा 3 से 8 हजार के बीच किया जाता था। इस दौरान आरोपित से गुजरात के जूनागढ़ निवासी मुर्तजा माकड़ की जानकारी मिली। टीम ने कई दिनों तक मुर्तजा की गतिविधियों पर नजर रखी। फोर्स के अधिकारियों के मुताबिक गुजरात के समुद्री इलाकों से कोरल को लाया जाता था। इसके बाद अलग-अलग राज्यों के व्यापारियों को मोटी रकम में बेचा जाता था। अधिकारियों ने रविवार को मुर्तजा को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया। उससे और जानकारियां मिलने की उम्मीद है।

कोरल को सजाने के लिए रखते थे घर में

समुद्री जीव कोरल को ज्यादातर लोग अपने घरों में सजाने के लिए खरीदते थे। जानकारी मिली है कि इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर में कोरल का सौदा किया गया है। अब फोर्स इनके बारे में पता लगाने में जुटी है। अधिकारियों के मुताबिक समुद्री जीवों का व्यापार करने पर सात साल की सजा का प्रावधान है।

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