सिंगरौली: अरबों की चपत, दोषी अधिकारी को बचाने में जुटे सेफ्टी इंचार्ज, निर्दोषों पर गाज

सिंगरौली। कोल इंडिया की मिनी रत्न कंपनी नार्दन कोलफील्ड लिमिटेड की खड़िया परियोजना की कोयला खदान में विगत 2 मई की दोपहर लगभग 12:15 बजे ड्रग लाइन सेक्शन के फोरमैन ए के सिंह की लापरवाही के कारण अरबों रुपए  की दो ड्रग लाइन मशीनें आपस में टकरा गईं जिससे कोलफील्ड को करोड़ों की चपत का अंदेशा है।

सूत्रों के अनुसार मामले में खड़िया क्षेत्र के जीएम संजय मिश्रा को एनसीएल मुख्यालय से संबद्ध करते हुए मुख्यालय में तैनात एमके प्रसाद को खड़िया परियोजना की जिम्मेदारी सौंपी गई खड़िया परियोजना के कोयलरी मैनेजर एस के साहू, प्रोजेक्ट ऑफिसर सईद गौरी, सहायक उत्खनन प्रबंधक बी के सिंह को निलंबित कर जांच शुरू कर दी गई है।

मामले पर एक नज़र
खदान क्षेत्र में सोमनाथ व विश्वनाथ नाम की दो ड्रग लाइन मशीनें काम कर रही थी 2 अरब से अधिक कीमत कि इन विदेशी मशीनों से अधिभार हटाने का काम किया जाता है। यहां चल रही चर्चाओं के मुताबिक परियोजना कर्मियों की माने तो बुधवार की दोपहर कार्य कर रही मशीनों को मूवमेंट कराने का कार्य फोरमैन ए के सिंह मशीन के नीचे से करा रहे थे । वायरलेस पर मिले संदेश और निर्देश के मुताबिक विश्वनाथ लाइन के ऑपरेटर बी पी सिंह ने मशीन का बूम घुमाना शुरू कर दिया, परंतु संचार कमी व लापरवाही बरतते हुए सोमनाथ लाइन को रोकने का दिशा निर्देश ए के सिंह ने नहीं दिया। जिससे सोमनाथ ड्रग लाइन को ऑपरेट कर रहे ऑपरेटर विनोद श्रीवास्तव बकेट खाली कर लोडिंग के लिए मशीन घुमा रहे थे, जिससे सोमनाथ ड्रग लाइन की बूम विश्वनाथ ड्रग लाइन की बूम से टकरा गई और देखते ही देखते विश्वनाथ ड्रग लाइन का बूम टूट कर नीचे आ गिरा|

दोषी अधिकारी को बचाने की कवायद
दुर्घटना के बाद तत्काल प्रभाव से तीन अधिकारियों को सस्पेंड करते हुए पूरे मामले की परियोजना स्तरीय जांच प्रारंभ हो गई और जांच का जिम्मा परियोजना सेफ्टी अधिकारी एमके सिंह के हाथ में था।

उधर यहाँ चर्चा है कि परियोजना सेफ्टी अधिकारी एमके सिंह और फोरमैन ए के सिंह का खून का रिश्ता है यह दोनों रिश्ते में सगे भाई हैं। विभागीय जांच मुख्य महाप्रबंधक कार्यालय में हो रही थी मौके पर मौजूद सभी कर्मचारियों के अलग-अलग बयान सेफ्टी इंचार्ज एम के सिंह दर्ज कर रहे थे परंतु इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चौका देने वाली बात यह है कि दोषी अधिकारी एके सिंह पूरे जांच के दौरान सेफ्टी इंचार्ज के सहकर्मी की भूमिका निभा रहे थे।

जांच कक्ष में पूरे समय बैठकर फोरमैन ए के सिंह सभी कर्मचारियों के बयान सुन रहे थे तथा अंतिम समय में अपने आप को दोष मुक्त करने के लिए मनगढ़ंत बयान अपने भाई से सेफ्टी इंचार्ज एम के सिंह के सामने प्रस्तुत कर निर्दोष कर्मचारियों के गले पर तलवार लटका कर बलि का बकरा बना दिया।

निर्दोष ऑपरेटर पर गिरी गाज

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सेफ्टी इंचार्ज एमके सिंह ने अपने दोषी भाई फोरमैन ए के सिंह को सभी कर्मचारियों के बयान की प्रतिलिपि उपलब्ध कराते हुए बचाने का पूरा प्रयास किया तथा मामले की लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जिससे फोरमैन ए के सिंह ने सभी के बयान को संज्ञान में लेते हुए अपने बचने के लिए मनघड़ंत बयान परियोजना स्तरीय जांच टीम के सामने प्रस्तुत करते हुए पूरा दोष ड्रग लाइन के ऑपरेटरों के ऊपर मढ़ दिया जिससे 5 मई को सोमनाथ व विश्वनाथ ड्रग लाइन के ऑपरेटर बी पी सिंह व विनोद श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया।

गौरतलब है कि ड्रग लाइन के ऑपरेटर बी पी सिंह को प्रतिवर्ष अत्यधिक उत्पादन व सुरक्षा के मामले में पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या उच्च वर्गीय अधिकारी परियोजना स्तरीय जांच में हुए इस हेरा फेरी को गंभीरता से संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष कार्यवाही करेंगे या फिर इसी तरह निर्दोष कर्मचारी ही बलि पर चढ़ेंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *