अब सिविल जज परीक्षा में दृष्टिबाधित को भी मिलेगा आरक्षण का लाभ

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण आदेश में साफ किया कि भविष्य में सिविल जज परीक्षा में शारीरिक रूप से विकलांग आवेदकों की श्रेणी में दृष्टिबाधितों को भी आरक्षण सहित अन्य छूट व सुविधाओं का पूरा लाभ दिया जाए।

मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने गुरुवार 3 मई को जबलपुर निवासी रश्मि ठाकुर की याचिका पर यह आदेश सुनाया। कोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन की पूर्व में की गई गलती को स्वीकार करते हुए एक माह के भीतर रश्मि के लिए सिविल जज की विशेष परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था दे दी।

आदेश में कहा गया है कि रश्मि के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने के साथ उसे दृष्टिबाधित होने के कारण राइटर मुहैया कराया जाए, साथ ही सभी सुविधाएं व छूट भी दी जाए। इसमें अतिरिक्त समय भी शामिल हो।

क्या है मामला- जबलपुर निवासी रश्मि ठाकुर ने 2012 में एलएलबी की डिग्री हासिल की। इसी के साथ एमपी स्टेट बार कौंसिल में अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत हो गई। वह जिला बार जबलपुर की सदस्य है। उसे जिला मेडिकल बोर्ड की ओर से प्रमाण-पत्र मिला हुआ है, जिसमें उसे 75 प्रतिशत दृष्टिबाधित घोषित किया गया है।

2017 में उसने सिविल जज परीक्षा दी। इसके लिए उसे राइटर अपेक्षित था। लेकिन पूर्व निर्धारित नियम में दृष्टिबाधिक को आरक्षण सहित अन्य लाभ दिए जाने का प्रावधान न होने के कारण लाभ से वंचित रखा गया। इस वजह से वह सिविल जज लिखित परीक्षा ठीक से नहीं दे पाई।

इसीलिए उसने अधिवक्ता सुरेन्द्र वर्मा के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। उसका कहना है कि शारीरिक रूप से विकलांग आवेदकों को 2 प्रतिशत रिजर्वेशन का प्रावधान उसके मामले में भी लागू होना चाहिए। पूर्व में उसने हाईकोर्ट प्रशासन के समक्ष आवेदन पेश किया था, जिसे रिजेक्ट कर दिए जाने के कारण याचिका लगानी पड़ी।

इंटरव्यू के लिए बुलाकर योग्य पाए जाने पर सिविल जज बनाओ- मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अपने ताजा आदेश में साफ कर दिया है कि नए सिरे से लिखित परीक्षा लेने के बाद यदि रश्मि योग्य पाई जाए तो उसे इंटरव्यू में बुलाकर उसकी काबिलियत साबित होने पर सिविल जज बनाया जाए।

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